Saturday, 29 September 2012

छुपे रुस्तम

""छुपे रुस्तम ""
आये है हम इस पवन धरा पर ,,,,,,
आपके लिए बहुत कुछ कर के जायेंगें ,,,
बद नसीबी इतनी है हमारी,,,,
कच्ची राहों से गुजर रही है ,,,,
किस्मत हमारी ,,,,,
कदम बढ़ नही रहे है ,,,,,
पूरा दम लगाने पर भी ,,,,
दुनियां से बेहतर करने का ,,,,
मादा रखते हैं हम भी ,,,,,
बस शर्त तुमसे ये है ,,,,
होंसला आपका चाहिए ,,,,
मेहनत होगी हमारी ,,,,,,!!!!
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भगत सिंह बेनीवाल

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