संजोता हूँ सपने
वतन की राहें
देखकर ,,,
बढ़ जाता हूँ
उन राहों में ,,,,,
वापीस लोट
आता हूँ ,,,
ये धूमिल राहें
देखकर ,,,,,,,!!!
भगत सिंह बेनीवाल
वतन की राहें
देखकर ,,,
बढ़ जाता हूँ
उन राहों में ,,,,,
वापीस लोट
आता हूँ ,,,
ये धूमिल राहें
देखकर ,,,,,,,!!!
भगत सिंह बेनीवाल
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