सरहद के उस पार से...........
हर दिन नई आवाजें आती है ................
मेरे दरवाजे पे तो दस्तक दे जाती है ..................
रोम -रोम में समा जाती है .............................. ......
क्या उनके दरवाजे के आगे से .............................. ......
निकल जाती है .............................. .............................. ..!!!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
हर दिन नई आवाजें आती है ................
मेरे दरवाजे पे तो दस्तक दे जाती है ..................
रोम -रोम में समा जाती है ..............................
क्या उनके दरवाजे के आगे से ..............................
निकल जाती है ..............................
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।