नजरअन्दाज करके
उस गरीब को ,,,,,,
जिसका चूल्हा
तरसता है
जलने को ,,,,,,,,
लचीले बिछोनो
पे चैन कैसे आता है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
उस गरीब को ,,,,,,
जिसका चूल्हा
तरसता है
जलने को ,,,,,,,,
लचीले बिछोनो
पे चैन कैसे आता है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
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