Thursday, 15 November 2012

अनजानी चोखट

दो हाथ बाधं कर ,,,,,
अनजानी चोखट
के दरवाजे को
खटखटाता है,,,,
ओढाकर सफेद
चद्दर छिपा लेता है
असलियत को,,,,,
देखकर अनजानी
तस्वीर चोखट
अपनी पे विवश

हो जाता है,,,,,,,
रखकर पत्थर
कलेजे पे
भेटं चढा देता है ,,,,,,
तस्वीर अपनी बेटी की,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!!

||भगत सिंह बेनीवाल||

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