सुगंध बगीचे से आती है
तारिफ़ बगीचे की नही
फुलों की होती है
निगाहें फुलों पर ही
टिक जाती है
गमले की ओर किसी की
तारिफ़ बगीचे की नही
फुलों की होती है
निगाहें फुलों पर ही
टिक जाती है
गमले की ओर किसी की
नही जाती है
फुलों की चमक
हर नजर पर छाप
छोङ जाती है
हद तो तब हो जाती
उस माली की
दिन-रात की कहानी
किसी को नजर
नही आती
वो खामोश तस्वीर
कुछ दुरी से ये सब
देखती रहती है,,,,,,,,,,,,,,!!!!
||भगत सिंह बेनीवाल||
फुलों की चमक
हर नजर पर छाप
छोङ जाती है
हद तो तब हो जाती
उस माली की
दिन-रात की कहानी
किसी को नजर
नही आती
वो खामोश तस्वीर
कुछ दुरी से ये सब
देखती रहती है,,,,,,,,,,,,,,!!!!
||भगत सिंह बेनीवाल||
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