उसकी मुरझाई हुई तसवीर
मुझे हतास कर गई ……॥
मेरे जहन मे नफ़रत का
उल्लास कर गई…………॥
नफ़रत पुरी भी नही कर सका
उसकी यादों का …………॥
सिलसिला शुरु।हो गया
मेरे जख्मों पे रब से की हुई……॥
वो फ़रियाद आ गई
मुझे मेरे जख्मों की मवाद याद गई ………………॥
||भगत ||
मुझे हतास कर गई ……॥
मेरे जहन मे नफ़रत का
उल्लास कर गई…………॥
नफ़रत पुरी भी नही कर सका
उसकी यादों का …………॥
सिलसिला शुरु।हो गया
मेरे जख्मों पे रब से की हुई……॥
वो फ़रियाद आ गई
मुझे मेरे जख्मों की मवाद याद गई ………………॥
||भगत ||
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