Monday, 10 December 2012

जिंदा रहने के लिये करता हुं दुश्मनी

जिंदा रहने के लिये
करता हुं दुश्मनी
जमाने से ……॥
दोस्ती तो तुमसे
सांसों से भी गहरी है……॥

भगत

होशियार ……

अगर हम होते आप जितने
होशियार ……
सफ़ेद चहरे आज भी देश ही
गलियों मे नजर आते……॥
आप तो आप ही हो …
आप तो खुद के भी नही हो
हम आपके कैसे हो गये…॥
तभी तो हम समय से पहले
चले गये…॥

भगत सिंह बेनीवाल

अमीरों के आशियानों से करवटों

अमीरों के आशियानों से करवटों
का शोर मुझे मेरे कानों को बेहाल कर जाता है
फुट्पाथ के खर्राटे मुझसे हजारों सवाल कर जाते है………………॥

भगत सिंह बेनीवाल

जो आज कुछ करता है वतन के वास्ते तो

जो आज कुछ करता है
वतन के वास्ते तो
गद्दार हो जाता है
जो बेहुदा नाच दिखाता है
वो सपनों का राजा बन जाता है…॥
भगत

मैने पुछा धरती मां से

मैने पुछा धरती मां से
मां ये क्या हाल बना हुआ है
इस वतन में कभी
मिसाल हमारी भी दी जाती थी
आज क्या हो गया है
वो सुरमें आज क्यों नही
जिनसे यम भी घबराता था
मां का जबाब मुझे बेसुध कर गया
बोली बेटा …
क्या तुम्हे वो क्या याद है ????????????????????

भगत सिंह बेनीवाल

आप हंसों ओर खिलखिलाओ

आप हंसों ओर खिलखिलाओ
तालीयां बजाओ कुछ ऐसा करुं

या

उनके लिये कुछ करुं जिनके कंधो
पर कचरे के थेले जिनकी रात फ़ुट्पात
पर गुजरती है ……………………………………॥

फैसला आपके हाथ ……………।

आपको कम ही जचेगी ………

जय हिन्द ………जय हिन्द

भगत सिंह बेनीवाल

इंसाफ़

इंसाफ़ अधुरा आज भी है
शायद अधुरा ही रहेगा ……???
मेरे वतन में हालात ही कुछ ऐसे है……
यहां इंसाफ़ की नही पैसे की पुजा होती है्………॥

भगत सिंह बेनीवाल

उसकी एक झलक

उसकी एक झलक
हजारों मुसाफ़िरों के
रास्ते बदल जाती है
ना जाने कितने ही
रास्ते जाम हो जाते है
हाथ हिलाकर छुमंतर हो जाते है…॥
क्या हक उन्हें है किसी की
राहें बदलने का……………॥

जय हिन्द जय भारत

बचपन गवाया

किसी ने बचपन गवाया
किसी ने घर-परिवार भुलाया
अपना फ़र्ज बखुबी निभाया
जिन्होने जाना दुनिया को
उन्हें हम नही जान पाये……

गरीब वो नही है जिसके तन पे पुरा कपड़ा नही है

गरीब वो नही है
जिसके तन पे पुरा
कपड़ा नही है
सोने को जगह नही है
खाने को पुरा खाना नही है
अरे गरीब तो वो है
जिसके पास पैसे है
पर कपड़े नही है
तन ढ्कने को
खाना है पर स्वाद का पता नही है

बिस्तर है पर चैन नही है
जिसके पास कुछ नही है
उसके पास सब कुछ है
ओर जिसके पास सबकुछ है
उसके पास कुछ नही है

भगत

दो लफ़्ज बोल देता है हकिकत के

दो लफ़्ज बोल देता है
हकिकत के
आगबबुले हो जाते है सफ़ेदपोश
सलाखें दिखा दी जाती है
सच तो वो ही जानते है
हमें क्या खाक आता है………

भगत

इतना भागा मैं जमाने को चीर कर

इतना भागा मैं
जमाने को चीर कर
निकल गया
हद से भी आगे
देखा जाकर तो
सुनसान दिखाई
दिया ……॥
पता ही नही चला
उधार में या नगदी में
मेरा कफ़न आया

मुझे अफ़सोस है आज भी
सब कुछ किया इक कफ़न
के वास्ते वो भी अपने
हाथों से खरीद नही पाया……………॥

भगत सिंह बेनीवाल

चलते हुये शमशान में

ये सोचकर ही ले लेते होगें
आप फैसला मेरी किस्मत का
ओर फेंक देते हो कुड़ादान में
चलते हुये शमशान में ……
हमनें जो अमानत खुन-पसीने
से है कमाई
ये डायन एक दिन में लुटकर
चली जायेगी……पराये देश में……॥

भगत सिंह बेनीवाल

गहरा भी मत लिख

इतना गहरा भी मत लिख
देना मेरे दोस्तो अगर कुछ लिखो तो
मुझे खुदा से इक और जीवन की गुहार
लगानी पड़े……………॥

भगत

दशहत

दशहत मेरी आपके दिलों में
युं घर कर गयी है…
मुझे मिटाने की जिद्द आपकी
आज तो मेरे भाईयों केसर भी
कोख मे कलम कर गयी है……
आजकल तो मैं आती ही
कहां हुं कोख में……
फिर भी पुन्य का
काम कर ही लेते हो……
वो परम भी नही भेज रहा है

इस धरा पे…… कहता है
बेटी सफ़र बहुत लम्बा है
क्या करो गी जा कर....
खड़े पांव ही लोट आना है............!!!!!

भगत सिंह बेनीवाल
मेरी आपके दिलों में
युं घर कर गयी है…
मुझे मिटाने की जिद्द आपकी
आज तो मेरे भाईयों केसर भी
कोख मे कलम कर गयी है……
आजकल तो मैं आती ही
कहां हुं कोख में……
फिर भी पुन्य का
काम कर ही लेते हो……
वो परम भी नही भेज रहा है
इस धरा पे…… कहता है
बेटी सफ़र बहुत लम्बा है
क्या करो गी जा कर....
खड़े पांव ही लोट आना है............!!!!!

भगत सिंह बेनीवाल

तम्बु

लगा लेते है तम्बु
हर चौराहे
हर दफ्तर
के आगे
सोये हुये
राक्षसों को
जगाने के
लिये…॥
अरे कसुर
क्या है

आपका
सफ़ेद्पोश
आता है
सावंत्ना
देकर चला
जाता है
कब जागोगे……॥

आप इसी हालात में

जैसा भी हुं
मुझे रहने दो
आप इसी हालात में
मैं खुद भी नही
अडिग अपनी बात पे
क्या असर करेंगी
आपकी ये धारा मुझपे
सिकने दो आप मुझे
इस धुप में
इम्तिहान खुद का

लेने दो …॥
जैसा भी हुं
मुझे रहने दो
आप इसी हालात में
आन्नद नही रहा है
अब इस फीकी मुस्कुराहट में……………॥

भगत

जो झुकता नही है

कहते हुये सुना है आपसे ही मैने
की जो झुकता नही है
वो टुट जाता है
टुटा हुआ तो बहुत काम आता है
झुका हुआ क्या काम आता है,………॥

भगत

जीवन एक हीरे की तरह है जितना चमके उतना ही कम है…

जीवन एक हीरे की तरह है जितना चमके उतना ही कम है…॥
ना चमके तो गम है अगर चमक गया तो क्या गम है……॥
ना चमके तो हजार जन्म भी कम है……॥
अगर चमक गया तो इस जीवन का समय ही काफी रह जाता है…॥

भगत …

मत बहाओ

मत बहाओ
इन मोती से
आंसुओ को……
अगर वो
बहा जाते
अपने आंसुओ
को बहा जाते
तो हम आज
उन समंदरों
में गोते लगाते……

ऐसा वो भी नही
कर गये
तो आप ऐसा
पसंद करोगे……॥

भगत ……

ये हकीक़त से रुबरु तो हो

अगर सपनें है
तेरे इतने ही नेक भगत
इन्हें यथार्थ पर ला
इनको इस धरा पर
चलना सिखा
ये हकीक़त से
रुबरु तो हो
हंसना सीखें
रोना सीखें
अगर होगें खड़े

अपने पांवों
पे तो पा लेगें
कामयाबी
बुझे हुये
दीपको को लौ
देगें...........

भगत सिंह बेनीवाल

तोड़कर परंपराओं को ……

क्या मिलेगा
तोड़कर परंपराओं
को ……
दिल से तो तोड़ नही
सकते हो
नाता जो है……
खुद को तोड़ो
अगर तोड़ सको तो……
क्यों रोक रखा है इन
हवाओं को……

इधर हम हंसेगें
उधर से तुम……

भगत

धरातल

आप रहो
चाहें …
धरातल से
उठकर
गुमान मत
करना मेरे दोस्त
इस बात का
जनाजे तो
जमींन से ही
उठते है

इंसाफ़ तो
कब्रिस्तान
ही करता है
उस धरातल
पर ही मेरा
उसी पे तेरा जनाजा रखा जाता है………॥

भगत सिंह बेनीवाल

बिरान

तेरी - मेरी
ये करतुत
ना जानें
कितनी ही
जुबानों को
बेजुबान कर
जाती है……
हरे -भरे
आंगन को
बिरान कर जाती है

हमारी सिद्धी तो
सिद्ध हो जाती है
पलायन कर
जाती है…
वो तस्वीरें उस धरातल से
क्या ह्में इतना हक है………
अभी तो हम अनजान है
इस बात से भी की हस्ती क्या है हमारी…॥
सुधर जाओ अब तो
बहुत हो गया है ये खेल
वरना इक इंकलाब ओर आयेगा………
क्या यही चाहते हो तुम …………
हम ही भगत, सुभाष , आज़ाद है ………

भगत सिंह बेनीवाल

लिख …लिखकर ……लिखना…

लिख …लिखकर ……लिखना……… सीख जायेगें
आप दोगे साथ तो ……कुछ पहले …सीख जायेगें …
वरना कुछ वक्त और सही …
जिद्द तुमसे नही खुद से की है ……पलायन से पहले ही
जरुर सीख जायेगें………,,॥

भगत सिंह बेनीवाल

पैसा

वो पैसा भी क्या काम का
जो औलाद को लाचार बना जाये
अखबारों ओर टी,वी, में खबर आये……
जिसका बाप हो नेता या अफ़सर कोई बड़ा
औलाद उसकी खुद को खुदा मानने लग जाती…॥

भगत

वतन के वास्ते

इतना कुछ किया था
उन्होने वतन के वास्ते
आप बचा तो ना सके …
ये आपकी भुल ही सही
गलतीयां अक्सर हो जाती है…
इन्सानों से ………
कुछ ऐसा जाना है मैने की
बोटी-बोटी कर दी थी…
बोरीयां भर दी थी……
केरोसीन से स्वाह कर दी थी……

आंसूओ का सैलाब नही आता
पर आपकी बिकी हुई जुबान ने
वो जमीं आंसूओं से दलदली कर दी थी……॥
………जय हिन्द जय भारत ……

भगत सिंह बेनीवाल

सपने

रोये तो वो
दगा सपने
जिनको दे गये………।

हमें यकीन
सपनो से
ज्यादा हाथों पे है……

भगत ………

पहला सलाम सुरज को

पहला सलाम सुरज को
तेरा होता है……
कदम भी तेरे ही रखे जाते है
इस स्थल पर पहले
खुन -पसीना बहाने मे भी
अव्वल
सबके लिये करने वाला ही तु
जब नाम आता है की
कुछ तो करो इसके लिये भी तो
हर कोई स्थान क्यों छोड़ जाता है……

क्या तु इतना अभागा है……
क्या इसीलिए कच्ची नींद मे जागा है ……
कुछ अरमान तो तु भी सजोता है

भगत ………

इन्सान

चाहें मन्दिर तोड़ो या मस्जिद तोड़ो
दोनों मे इन्सान ही रहते है
इन्सान ही इन्सान से ही मिलते है
हम तो इन्सान ही तोड़ रहे है…………
अपनी जुबान से बोलते है
हम इन्सान जोड़ रहे है……………॥

भगत …………/॥
मुझे भी आते है ये प्यार भरे हर्फ़
लिखने
असर क्या करेगें आपकी सेहत पर
आज तो नफ़रत भी तो इस कद्दर है
भाई को भाई से बहिन को भाई से
इंसान को खुदा से
बंदे को मंदिर मस्जिद से
हम से तुम से तुम को हम से
वतन भी रास नही आ रहा है…………
तो ये कागज काले क्यों करुं

एक रुल ऐसा भी आ सकता है की
यहां पे विदेशी कलम हमारे सफ़ेद
कागजो पे लिखे गी ……………………॥

भगत ………॥

हर दिन जब आता है लाली के साथ

  1. इन झोंपड़ीयो में
    जाने पहचाने चहरे को
    चरता हुआ देखता हुं
    इक बनावटी आनन्द देखता हुं
    सबरी का प्यार ओर त्याग देखता हुं
    उस चहरे की दरियादिली देखता हुं
    उसकी रसोई का समान देखता हुं
    उस चुल्हे का बलिदान देखता हुं
    बिन बुलाये महमान देखता हुं
    कैसे पचाता होगा वो
    अफसोस है ये ना देख पाता हुं

    भगत सिंह बेनीवाल …………जय हिन्द
  2. युं बेवजह किसी को सताया
    नही करते है
    किसी की मजबुरी का फ़ायदा
    उठाया नही करते है
    जो है मजबुर तो झुक जाती है
    नजरें उसकी
    झुकी हुई नजर को भी है हक
    ये सुन्दर गगन देखने का
    ये विरासत हमारी जागीर नही है
    जो तुं फ़ुद्क-फ़ुद्क कर चल रहा है
    ये तो बस दो दिन का खेल है
    ये कागज के पन्ने तो बस हाथों का मैल है
    आज यहां कल कही ओर सही ……
    खुद के आंचल मे झांक ॥

    भगत सिंह बेनीवाल
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  3. अदीबों की इस महफिल मे
    आज अत्फ़ एक दिखावा है भगत
    अलीम तो बस एक खाखा है
    इक़्तिज़ा ये तेरी मेरी है ……………॥

    भगत …………
  4. अगर हम खुद गुड़ खाते है …………तो दुसरों को गुड़ ना खाने की नसीयत कभी ना दे तो ही अच्छा रहता है
    ये मेरी व्यक्तिगत राय है ……………जय हिन्द
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  5. इक ललक जो जाग्रत होती
    सुरज किरणों की तरह
    मेरे जहन में ……
    उम्मीदों का झरना सा
    बहा देती है मेरे जहन
    अब तो कुछ होगा ……
    सपना जो देखा था यथार्थ दे दुर
    कभी बंद पलकों मे ही सही
    अब तो यथार्थ
    इस बात का गवाह होगा ……
    ये शर्त तो ना थी उस वक्त
    मै एक झलक का भी प्यासा
    रह जाऊँगा ……

    कागज के फूल कहां बहते है
    ज्यादा देर तक दरिया में ……
    वो तो हमारे अहसास को
    जिन्दा रखने लिये ही
    उन लहरों से टक्कर लेते है ……
    जैसे अस्पताल मे रोगी को
    क्रत्रिम श्वास देते है
    अगर अब भी हमें हो गीला फुलों से
    तो बेजुबान हुं मै ……
    जो भी हुआ तेरे साथ अक्सर होता है
    सभी के साथ ……
    बंद कर दे अब भी वक्त है
    बंद पलकों मे सपनें संजोना
    जिंदा दिलों का काम नही होता है ये
    सपना तो वही सच होता है
    जिसका मुकाबला य्थार्थ से होता है

    भगत सिंह बेनीवाल ……………जय हिन्द
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  6. दैनिक विश्व भारती मे मेरी चार रचनायें प्रकाशित
    अरुन जी आपका शुक्रिया आपने हमे इस काबिल जाना ………जय हिन्द
    http://www.dainikvishwabharti.com/category.php?hc=13&pc=8
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  7. ये सभी को पता है की शहीद भगत सिंह नास्तिक थे
    उन्होने जाते -जाते ये भी तो कहा था की
    भारत माँ आप रोना मत एक रोज मै फिर आऊँगा ……???????
    सवाल आप से ……………
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  8. मैने लहलाती फसल हुं
    लहलाने दो मुझे ........
    उस की इज्जत आबरु हुं मै
    जो मेरे लिये रात -दिन
    जागता है कच्ची नींद मे भागता है
    उसकी सांसे हुं मै ……
    उसके परिवार का सुनहरा सपना हुं मैं ……॥

    भगत …………
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  9. ज़बर का ये कमाल है
    हर रिस्ता हलाल है ……

    भगत …………
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  10. परिवर्तन सब की चाहत है
    घर की चोखट छोड़ ना पाते है
    हर किसी के पास है जज्बातों
    अपार भंडार …कसर इक ही है बस
    जज्बातों से जज्बात नही जोड़ पाते है …………।

    भगत ……॥
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  11. राहें ना बदलती है
    राहगीर बदल जाते है
    सांसे नही थमती है
    शरीर थम जाते है
    तकद्दीर नही बदलती है
    ताकत बदल जाती है
    समझ ना बदला करती है
    समझदार बदल जाते है
    रिस्ते नही टुटते है
    रिस्तेदार टुट जाया करते है
    हक नही दबता है
    हकदार दब जाया करते है
    वफा दगा नही देती है
    वफादार दगा दे जाया करते है
    आप हमें देखकर हम आपको
    देखकर भी बदल जाते है ………………………॥

    जय हिन्द
    भगत सिंह बेनीवाल
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  12. gooooooooood
    Morningggggggggggggggggggggggggggggggggggg
    mitrooooooooo
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  13. जिसे हम रास ना आये
    भला उसे कोई
    ओर क्या आयेगा ……
    जो हमे भी ना जान पाया
    भला किसी ओर को
    क्या जान जायेगा ………
    हमने तो कर ली थी तैयारी
    इक ताज बनाने की ………
    हाल यही रहा उसका तो
    इक ओर ताज अधुरा छोड़ जायेगा …………॥

    भगत ………………
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  14. कृपया dainikvishwabharti पेज को JOIN करें
    आपका सहयोग, हमारा उत्साह
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  15. आपके पास की ऐसी सूचनाएं जिसे आप हमारे साथ साझा करना चाहे या फिर पूरे देश को बताना चाहे, तो स्‍वागत है आपका dainikvishwabharti.com news portal keमैं भी रिपोर्टर में.
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  16. अपनी औकात
    बताने का भी मादा
    तभी तो दुनियाँ
    खुबसुरत बनाने का
    इरादा रखता हुं

    भगत ……………।
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  17. ऊँची दुकान फीके पकवान

    जय जवान जय किसान
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  18. अब तक जुबां पे लगाम क्यों है
    ये भी तो सोच तु ……………
    घर का बर्तन भी गिरता है आंगन मे
    आवाज चोपाल तक जाती है ………
    बस यही बात है
    मैने सुना है की समझदार को
    तो समझ इशारों से ही आ जाती है ……………॥

    भगत ………………………………
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  19. इक अच्छी मौत का गवाह इंसान के साथ - साथ श्मसान भी होता है …………॥
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  21. जिनका कोई नही उनके
    हम है …………
    जिनके साथ हम है
    उनको क्या गम है ……………॥

    भगत ………
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  22. कुछ ये भी तो देख लो जरा ………कहते है आदमी को वर्तमान ओर भविष्य का फ़ैसला
    करने से पह्ले भुतकाल भी देख लेना चाहिये ………………जय हिन्द

    ईस्ट इण्डिया कम्पनी एक निजी व्यापारिक कम्पनी थी, जिसने 1600 ई. में शाही अधिकार पत्र द्वारा व्यापार करने का अधिकार प्राप्त कर लिया था। इसकी स्थापना 1600 ई. के अन्तिम दिन महारानी एलिजाबेथ प्रथम के एक घोषणापत्र द्वारा हुई थी। यह लन्दन के व्यापारियों की कम्पनी थी, जिसे पूर्व...
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  23. भीड़ से अलग रहे ....
    ना किसी को पाया है
    ना किसी को खोया है
    जिसने हमे जाना
    वो अब भी पास है ……………
    जिसको हमनें जाना
    वो तो बहुत ही खास है ………
    ना फिजूल खर्ची
    ना टाइम पास है
    हर काम बड़ी सिद्दत से होता है
    अपना तो …………॥

    भगत …………
  24. हो सके जितना शेयर करें भाईयो- बहिनों जय हिन्द ……
    उपयोगी जानकारी......
    कृपया सभी भारतीयों तक पहुंचा दें।

    1. यदि आप भारत में
    कहीं भी बच्चों को भीख मांगते देखते हैं,

    तो कृपया संपर्क करें:
    "RED SOCIETY" 9940217816 पर . ये
    उन बच्चों की पढाई में मदद करेंगे।

    ...
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  25. कुछ पलकें इधर भी करो जरा बंधुओ …………
    आप भारतीय हैं या इन्डियन ??????
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  26. तुम धोखा देते हो बार - बार
    हमे भी तो मौका दे दो एक बार ……॥
    हम भी तो अजमा के देख ले
    बंदा कैसे करता है नफ़रत बार-बार ……॥
    भगत ………
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  27. राष्ट्र - प्रेम खेल नही है भगत
    तेरे कागज ओर कलम का
    बस बोली लगती है
    ओर उन अलमारीयों की
    शोभा बनती है ……
    वाह -वाह होती है
    तालियां बजती है
    महफ़िले हँसती ……
    क्या यही तेरे अरमान भगत
    सोच थी तेरी की
    बिखरे हुये हर्फ़ो को आशियाना दे दुं
    कुछ परिवर्तन तो होगा ही
    अगर है ये परिवर्तन तो
    मुझे बाढ कही नजर ना आ रही है
    मुझे अपनी गलती की सजा मत देना
    गलतीयां अक्सर हो जाया करती है
    बन्दे से ……
    यहां तो खुन भी
    सस्ता मिलता है आज …

    काले कागज कौन पढता है आज ……………॥

    ॥…भगत सिंह बेनीवाल ……॥
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  28. एक राजस्थानी कहावत है

    जद बाड़ ही खेत न खाव
    तो कुण बचाव …………………………॥
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  29. जितना भी कमाया है
    अपनों ने ही तो कमाया है
    अब तो सड़को के गढ्ढे भर जायेगें
    फुटपाथ भरे हुये नजर नहीं आयेगें
    जय हिन्द ………
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  30. अब नही
    तो कुछ देर ही सही
    सड़को पे तो आना ही होगा
    जिनको भुल बेठे है हम
    उनकी तस्वीरों के साथ
    फिर से आना होगा
    भलाई तो इसी में है
    पांव रखने से पहले ही
    संभाल ले इस जमीं को
    वरना खुन तो बहाना ही होगा
    अब तो साबित ही हो गया है ये
    जंग खा गये है ये हाथ
    काम करने की नियत को
    हासिल करना होगा …………

    भगत
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  31. अगर बिकना ही है
    तो सरेयाम बिको
    बंद दीवारों मे तो
    बुझ दिल बिका करते है ………

    भगत …………
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  32. माँ की ममता के आगे तो सब जहाँ समा जाता है………………।
  33. हम जियेगें तब तक
    सांसे है इस देह मे है
    आपके खानदान
    की मेहरबानी नही है
    रब से रिस्ता ही गहरा है

    भगत …………
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  34. सोचता तो वो है
    वतन के वास्ते
    जिसकी किलकारियाँ
    गुंजी हो इस धरा पर
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  35. लाखों समझाया ………
    उसको समझ ना आया
    वो हर मन्दिर -मस्जिद
    जाके आया ……
    उसका ये वक्त
    मुझे उन हालातों से उभार लाया …………
    अब मुझे हर मन्दिर मस्जिद
    मे वो ही नजर आता है………………॥

    भगत …………।
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  36. मेरी जानकी मौसी के घर जब तीसरी बेटी ने जन्म लिया था ,तब उस समय अड़ोस पड़ोस,रिश्तेदार सब ने उनके पास आ कर उनके यहाँ तीसरी लडकी केपैदा होने पर अफ़सोस जताया था ,लेकिन जानकी मौसी ने उन सबक
    ा यह कह कर मुंह बंद कर दिया था ,”यह मेरी बेटी है मैने ...See More
    — with Kumud Jain and 48 others.
  37. हर दिन जब आता है लाली के साथ
    कहता है बहुत कुछ
    मुझसे………
    मौन हो जाता हुं
    जाता -जाता ये ही सवाल फिर
    दोहरा जाता है…………
    ये कहकर विदा कर देता हुं………
    आज तो कुछ सही नही
    कल फ़िर आना तुम जरुर कुछ
    करुंगा …………
    वो तो कायम है अपनी जुबां पे
    सवाल खुद से कर
    उससे मत डर की वो आयेगा
    उसका यही काम है आना - जाना
    आता रहेगा - जाता रहेगा
    इक जिद्द ही काफी है खुद से
    उसके हर सवाल का राज छिपा है उसमें
    कुछ तो कर ले बन्दे
    हर बार नही कहेगा ……………
    तुमसे की कुछ तो कर बन्दे …………
    वो यु हंसेगा की ऐसी आज तक ना
    देखी होगी तुमने कभी …………॥
    हर किसी को किस्सा तेरा ही सुनायेगा………॥…
    कुछ तो कर बन्दे …
    कुछ तो कर बन्दे …
    कुछ तो कर बन्दे …

    भगत सिंह बेनीवाल