दशहत मेरी आपके दिलों में
युं घर कर गयी है…
मुझे मिटाने की जिद्द आपकी
आज तो मेरे भाईयों केसर भी
कोख मे कलम कर गयी है……
आजकल तो मैं आती ही
कहां हुं कोख में……
फिर भी पुन्य का
काम कर ही लेते हो……
वो परम भी नही भेज रहा है
युं घर कर गयी है…
मुझे मिटाने की जिद्द आपकी
आज तो मेरे भाईयों केसर भी
कोख मे कलम कर गयी है……
आजकल तो मैं आती ही
कहां हुं कोख में……
फिर भी पुन्य का
काम कर ही लेते हो……
वो परम भी नही भेज रहा है
युं घर कर गयी है…
मुझे मिटाने की जिद्द आपकी
आज तो मेरे भाईयों केसर भी
कोख मे कलम कर गयी है……
आजकल तो मैं आती ही
कहां हुं कोख में……
फिर भी पुन्य का
काम कर ही लेते हो……
वो परम भी नही भेज रहा है
इस धरा पे…… कहता है
बेटी सफ़र बहुत लम्बा है
क्या करो गी जा कर....
खड़े पांव ही लोट आना है............!!!!!
भगत सिंह बेनीवाल
मेरी आपके दिलों में बेटी सफ़र बहुत लम्बा है
क्या करो गी जा कर....
खड़े पांव ही लोट आना है............!!!!!
भगत सिंह बेनीवाल
युं घर कर गयी है…
मुझे मिटाने की जिद्द आपकी
आज तो मेरे भाईयों केसर भी
कोख मे कलम कर गयी है……
आजकल तो मैं आती ही
कहां हुं कोख में……
फिर भी पुन्य का
काम कर ही लेते हो……
वो परम भी नही भेज रहा है
इस धरा पे…… कहता है
बेटी सफ़र बहुत लम्बा है
क्या करो गी जा कर....
खड़े पांव ही लोट आना है............!!!!!
भगत सिंह बेनीवाल
बेटी सफ़र बहुत लम्बा है
क्या करो गी जा कर....
खड़े पांव ही लोट आना है............!!!!!
भगत सिंह बेनीवाल
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