Monday, 10 December 2012

दशहत

दशहत मेरी आपके दिलों में
युं घर कर गयी है…
मुझे मिटाने की जिद्द आपकी
आज तो मेरे भाईयों केसर भी
कोख मे कलम कर गयी है……
आजकल तो मैं आती ही
कहां हुं कोख में……
फिर भी पुन्य का
काम कर ही लेते हो……
वो परम भी नही भेज रहा है

इस धरा पे…… कहता है
बेटी सफ़र बहुत लम्बा है
क्या करो गी जा कर....
खड़े पांव ही लोट आना है............!!!!!

भगत सिंह बेनीवाल
मेरी आपके दिलों में
युं घर कर गयी है…
मुझे मिटाने की जिद्द आपकी
आज तो मेरे भाईयों केसर भी
कोख मे कलम कर गयी है……
आजकल तो मैं आती ही
कहां हुं कोख में……
फिर भी पुन्य का
काम कर ही लेते हो……
वो परम भी नही भेज रहा है
इस धरा पे…… कहता है
बेटी सफ़र बहुत लम्बा है
क्या करो गी जा कर....
खड़े पांव ही लोट आना है............!!!!!

भगत सिंह बेनीवाल

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