युं बेवजह किसी को सताया
नही करते है
किसी की मजबुरी का फ़ायदा
उठाया नही करते है
जो है मजबुर तो झुक जाती है
नजरें उसकी
झुकी हुई नजर को भी है हक
ये सुन्दर गगन देखने का
ये विरासत हमारी जागीर नही है
जो तुं फ़ुद्क-फ़ुद्क कर चल रहा है
नही करते है
किसी की मजबुरी का फ़ायदा
उठाया नही करते है
जो है मजबुर तो झुक जाती है
नजरें उसकी
झुकी हुई नजर को भी है हक
ये सुन्दर गगन देखने का
ये विरासत हमारी जागीर नही है
जो तुं फ़ुद्क-फ़ुद्क कर चल रहा है
ये तो बस दो दिन का खेल है
ये कागज के पन्ने तो बस हाथों का मैल है
आज यहां कल कही ओर सही ……
खुद के आंचल मे झांक ॥
भगत सिंह बेनीवाल
ये कागज के पन्ने तो बस हाथों का मैल है
आज यहां कल कही ओर सही ……
खुद के आंचल मे झांक ॥
भगत सिंह बेनीवाल
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