मैने लहलाती फसल हुं
लहलाने दो मुझे ........
उस की इज्जत आबरु हुं मै
जो मेरे लिये रात -दिन
जागता है कच्ची नींद मे भागता है
उसकी सांसे हुं मै ……
उसके परिवार का सुनहरा सपना हुं मैं ……॥
भगत …………
लहलाने दो मुझे ........
उस की इज्जत आबरु हुं मै
जो मेरे लिये रात -दिन
जागता है कच्ची नींद मे भागता है
उसकी सांसे हुं मै ……
उसके परिवार का सुनहरा सपना हुं मैं ……॥
भगत …………
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