चाहें मन्दिर तोड़ो या मस्जिद तोड़ो
दोनों मे इन्सान ही रहते है
इन्सान ही इन्सान से ही मिलते है
हम तो इन्सान ही तोड़ रहे है…………
अपनी जुबान से बोलते है
हम इन्सान जोड़ रहे है……………॥
भगत …………/॥
दोनों मे इन्सान ही रहते है
इन्सान ही इन्सान से ही मिलते है
हम तो इन्सान ही तोड़ रहे है…………
अपनी जुबान से बोलते है
हम इन्सान जोड़ रहे है……………॥
भगत …………/॥
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