क्या मिलेगा
तोड़कर परंपराओं
को ……
दिल से तो तोड़ नही
सकते हो
नाता जो है……
खुद को तोड़ो
अगर तोड़ सको तो……
क्यों रोक रखा है इन
हवाओं को……
तोड़कर परंपराओं
को ……
दिल से तो तोड़ नही
सकते हो
नाता जो है……
खुद को तोड़ो
अगर तोड़ सको तो……
क्यों रोक रखा है इन
हवाओं को……
इधर हम हंसेगें
उधर से तुम……
भगत
उधर से तुम……
भगत
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