- ActivityRecentBhagat liked Bhartiya youth.Bhagat is now friends with Turaska Jyoti Choudhury and 16 other people.Bhagat earned 10 friends badge on TripAdvisor.
- इन झोंपड़ीयो में
जाने पहचाने चहरे को
चरता हुआ देखता हुं
इक बनावटी आनन्द देखता हुं
सबरी का प्यार ओर त्याग देखता हुं
उस चहरे की दरियादिली देखता हुं
उसकी रसोई का समान देखता हुं
उस चुल्हे का बलिदान देखता हुं
बिन बुलाये महमान देखता हुं
कैसे पचाता होगा वोअफसोस है ये ना देख पाता हुं
भगत सिंह बेनीवाल …………जय हिन्द - युं बेवजह किसी को सताया
नही करते है
किसी की मजबुरी का फ़ायदा
उठाया नही करते है
जो है मजबुर तो झुक जाती है
नजरें उसकी
झुकी हुई नजर को भी है हक
ये सुन्दर गगन देखने का
ये विरासत हमारी जागीर नही है
जो तुं फ़ुद्क-फ़ुद्क कर चल रहा हैये तो बस दो दिन का खेल है
ये कागज के पन्ने तो बस हाथों का मैल है
आज यहां कल कही ओर सही ……
खुद के आंचल मे झांक ॥
भगत सिंह बेनीवाल - अदीबों की इस महफिल मे
आज अत्फ़ एक दिखावा है भगत
अलीम तो बस एक खाखा है
इक़्तिज़ा ये तेरी मेरी है ……………॥
भगत …………
LikesRecently- अगर हम खुद गुड़ खाते है …………तो दुसरों को गुड़ ना खाने की नसीयत कभी ना दे तो ही अच्छा रहता है
ये मेरी व्यक्तिगत राय है ……………जय हिन्द - इक ललक जो जाग्रत होती
सुरज किरणों की तरह
मेरे जहन में ……
उम्मीदों का झरना सा
बहा देती है मेरे जहन
अब तो कुछ होगा ……
सपना जो देखा था यथार्थ दे दुर
कभी बंद पलकों मे ही सही
अब तो यथार्थ
इस बात का गवाह होगा ……ये शर्त तो ना थी उस वक्त
मै एक झलक का भी प्यासा
रह जाऊँगा ……
कागज के फूल कहां बहते है
ज्यादा देर तक दरिया में ……
वो तो हमारे अहसास को
जिन्दा रखने लिये ही
उन लहरों से टक्कर लेते है ……
जैसे अस्पताल मे रोगी को
क्रत्रिम श्वास देते है
अगर अब भी हमें हो गीला फुलों से
तो बेजुबान हुं मै ……
जो भी हुआ तेरे साथ अक्सर होता है
सभी के साथ ……
बंद कर दे अब भी वक्त है
बंद पलकों मे सपनें संजोना
जिंदा दिलों का काम नही होता है ये
सपना तो वही सच होता है
जिसका मुकाबला य्थार्थ से होता है
भगत सिंह बेनीवाल ……………जय हिन्द - दैनिक विश्व भारती मे मेरी चार रचनायें प्रकाशित
अरुन जी आपका शुक्रिया आपने हमे इस काबिल जाना ………जय हिन्द
http://www.dainikvishwabharti.com/ category.php?hc=13&pc=8 - ये सभी को पता है की शहीद भगत सिंह नास्तिक थे
उन्होने जाते -जाते ये भी तो कहा था की
भारत माँ आप रोना मत एक रोज मै फिर आऊँगा ……???????
सवाल आप से …………… - मैने लहलाती फसल हुं
लहलाने दो मुझे ........
उस की इज्जत आबरु हुं मै
जो मेरे लिये रात -दिन
जागता है कच्ची नींद मे भागता है
उसकी सांसे हुं मै ……
उसके परिवार का सुनहरा सपना हुं मैं ……॥
भगत ………… - परिवर्तन सब की चाहत है
घर की चोखट छोड़ ना पाते है
हर किसी के पास है जज्बातों
अपार भंडार …कसर इक ही है बस
जज्बातों से जज्बात नही जोड़ पाते है …………।
भगत ……॥ - राहें ना बदलती है
राहगीर बदल जाते है
सांसे नही थमती है
शरीर थम जाते है
तकद्दीर नही बदलती है
ताकत बदल जाती है
समझ ना बदला करती है
समझदार बदल जाते है
रिस्ते नही टुटते है
रिस्तेदार टुट जाया करते हैहक नही दबता है
हकदार दब जाया करते है
वफा दगा नही देती है
वफादार दगा दे जाया करते है
आप हमें देखकर हम आपको
देखकर भी बदल जाते है ………………………॥
जय हिन्द
भगत सिंह बेनीवाल - gooooooooood
Morningggggggggggggggggggggggggggggggggggg
mitrooooooooo - जिसे हम रास ना आये
भला उसे कोई
ओर क्या आयेगा ……
जो हमे भी ना जान पाया
भला किसी ओर को
क्या जान जायेगा ………
हमने तो कर ली थी तैयारी
इक ताज बनाने की ………
हाल यही रहा उसका तो
इक ओर ताज अधुरा छोड़ जायेगा …………॥
भगत ……………… - अपनी औकात
बताने का भी मादा
तभी तो दुनियाँ
खुबसुरत बनाने का
इरादा रखता हुं
भगत ……………। - अब तक जुबां पे लगाम क्यों है
ये भी तो सोच तु ……………
घर का बर्तन भी गिरता है आंगन मे
आवाज चोपाल तक जाती है ………
बस यही बात है
मैने सुना है की समझदार को
तो समझ इशारों से ही आ जाती है ……………॥
भगत ……………………………… 
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kuchh time nikalkar ise bhi padh le jra ..................- जिनका कोई नही उनके
हम है …………
जिनके साथ हम है
उनको क्या गम है ……………॥
भगत ……… - कुछ ये भी तो देख लो जरा ………कहते है आदमी को वर्तमान ओर भविष्य का फ़ैसला
करने से पह्ले भुतकाल भी देख लेना चाहिये ………………जय हिन्द
ईस्ट इण्डिया कम्पनी एक निजी व्यापारिक कम्पनी थी, जिसने 1600 ई. में शाही अधिकार पत्र द्वारा व्यापार करने का अधिकार प्राप्त कर लिया था। इसकी स्थापना 1600 ई. के अन्तिम दिन महारानी एलिजाबेथ प्रथम के एक घोषणापत्र द्वारा हुई थी। यह लन्दन के व्यापारियों की कम्पनी थी, जिसे पूर्व...See More - भीड़ से अलग रहे ....
ना किसी को पाया है
ना किसी को खोया है
जिसने हमे जाना
वो अब भी पास है ……………
जिसको हमनें जाना
वो तो बहुत ही खास है ………
ना फिजूल खर्ची
ना टाइम पास है
हर काम बड़ी सिद्दत से होता हैअपना तो …………॥
भगत ………… - हो सके जितना शेयर करें भाईयो- बहिनों जय हिन्द ……
- कुछ पलकें इधर भी करो जरा बंधुओ …………
- तुम धोखा देते हो बार - बार
हमे भी तो मौका दे दो एक बार ……॥
हम भी तो अजमा के देख ले
बंदा कैसे करता है नफ़रत बार-बार ……॥
भगत ……… - राष्ट्र - प्रेम खेल नही है भगत
तेरे कागज ओर कलम का
बस बोली लगती है
ओर उन अलमारीयों की
शोभा बनती है ……
वाह -वाह होती है
तालियां बजती है
महफ़िले हँसती ……
क्या यही तेरे अरमान भगत
सोच थी तेरी कीबिखरे हुये हर्फ़ो को आशियाना दे दुं
कुछ परिवर्तन तो होगा ही
अगर है ये परिवर्तन तो
मुझे बाढ कही नजर ना आ रही है
मुझे अपनी गलती की सजा मत देना
गलतीयां अक्सर हो जाया करती है
बन्दे से ……
यहां तो खुन भी
सस्ता मिलता है आज …
काले कागज कौन पढता है आज ……………॥
॥…भगत सिंह बेनीवाल ……॥ - जितना भी कमाया है
अपनों ने ही तो कमाया है
अब तो सड़को के गढ्ढे भर जायेगें
फुटपाथ भरे हुये नजर नहीं आयेगें
जय हिन्द ……… - अब नही
तो कुछ देर ही सही
सड़को पे तो आना ही होगा
जिनको भुल बेठे है हम
उनकी तस्वीरों के साथ
फिर से आना होगा
भलाई तो इसी में है
पांव रखने से पहले ही
संभाल ले इस जमीं को
वरना खुन तो बहाना ही होगाअब तो साबित ही हो गया है ये
जंग खा गये है ये हाथ
काम करने की नियत को
हासिल करना होगा …………
भगत - अगर बिकना ही है
तो सरेयाम बिको
बंद दीवारों मे तो
बुझ दिल बिका करते है ………
भगत ………… 
Bhagat Singh Beniwal shared Sunil Jangra's photo.
माँ की ममता के आगे तो सब जहाँ समा जाता है………………।- हम जियेगें तब तक
सांसे है इस देह मे है
आपके खानदान
की मेहरबानी नही है
रब से रिस्ता ही गहरा है
भगत ………… - लाखों समझाया ………
उसको समझ ना आया
वो हर मन्दिर -मस्जिद
जाके आया ……
उसका ये वक्त
मुझे उन हालातों से उभार लाया …………
अब मुझे हर मन्दिर मस्जिद
मे वो ही नजर आता है………………॥
भगत …………। - मेरी जानकी मौसी के घर जब तीसरी बेटी ने जन्म लिया था ,तब उस समय अड़ोस पड़ोस,रिश्तेदार सब ने उनके पास आ कर उनके यहाँ तीसरी लडकी केपैदा होने पर अफ़सोस जताया था ,लेकिन जानकी मौसी ने उन सबक— with Kumud Jain and 48 others.
ा यह कह कर मुंह बंद कर दिया था ,”यह मेरी बेटी है मैने ...See More - हर दिन जब आता है लाली के साथ
कहता है बहुत कुछ
मुझसे………
मौन हो जाता हुं
जाता -जाता ये ही सवाल फिर
दोहरा जाता है…………
ये कहकर विदा कर देता हुं………
आज तो कुछ सही नही
कल फ़िर आना तुम जरुर कुछ
करुंगा …………वो तो कायम है अपनी जुबां पे
सवाल खुद से कर
उससे मत डर की वो आयेगा
उसका यही काम है आना - जाना
आता रहेगा - जाता रहेगा
इक जिद्द ही काफी है खुद से
उसके हर सवाल का राज छिपा है उसमें
कुछ तो कर ले बन्दे
हर बार नही कहेगा ……………
तुमसे की कुछ तो कर बन्दे …………
वो यु हंसेगा की ऐसी आज तक ना
देखी होगी तुमने कभी …………॥
हर किसी को किस्सा तेरा ही सुनायेगा………॥…
कुछ तो कर बन्दे …
कुछ तो कर बन्दे …
कुछ तो कर बन्दे …
भगत सिंह बेनीवाल
Monday, 10 December 2012
हर दिन जब आता है लाली के साथ
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