गरीब की शक्ल से नफरत
करता हुआ नजर आता है
हर कोई ,,,,,,,,
खुद की शक्ल आयने में
देखकर मुस्कुराता है आज
हर कोई ,,,,,,,,
करता हुआ नजर आता है
हर कोई ,,,,,,,,
खुद की शक्ल आयने में
देखकर मुस्कुराता है आज
हर कोई ,,,,,,,,
क्यों नही जलती है
गरीब की रसोई
ये नही सोचता है
हर कोई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
गरीब की रसोई
ये नही सोचता है
हर कोई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
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