कोन पराया
कोन अपना है
बस ये तो एक
सपना है जो
कुछ देर तो
अपना है
फिर राहें ताकना है
बंद पलकों में
नये सपने झाकना है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!!! !
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
कोन अपना है
बस ये तो एक
सपना है जो
कुछ देर तो
अपना है
फिर राहें ताकना है
बंद पलकों में
नये सपने झाकना है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
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