जीते जी बना दिए है मोम के चहरे यहाँ -वहां ,,,,
भीड. जमती है हर तरफ वाह -वाह की आवाज़ आती है ,,,,,
मन ही मन मंद-मंद मुस्कुराते है जिनकी वजह से बने है ये चहरे ,,,,
उनकी यादों में आज सनाटे है हमे याद वो क्यों नही आते है ,,,,,
भगत सिंह बेनीवाल
भीड. जमती है हर तरफ वाह -वाह की आवाज़ आती है ,,,,,
मन ही मन मंद-मंद मुस्कुराते है जिनकी वजह से बने है ये चहरे ,,,,
उनकी यादों में आज सनाटे है हमे याद वो क्यों नही आते है ,,,,,
भगत सिंह बेनीवाल
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