जब लिखे थे आपने ,,,
अपने जज्बात और इरादे ,,,,
अपनों के जख्मों का दर्द ,,,
और पीडा. उन हालातों में ,,,,,
अपने जज्बात और इरादे ,,,,
अपनों के जख्मों का दर्द ,,,
और पीडा. उन हालातों में ,,,,,
उन सुनहरे पन्नो में ,,,,
आज भी महक आ रही है ,,,
उस स्याही और पन्नो में ,,,
दिल खिल उठता है,,,,
आँखों में सेलाब उठता है ,,,,
हर शब्द ,लाइन पहरा बोलता है ,,,
और तस्वीर आपकी ही ,,,,,
नजरों में नजर आती है ,,,,
इन पन्नो को छिपाने की ,,,,
लाखों कोशिशें उनकी नाकाम जाती है ,,,
आज का खून जमा हुआ नजर आता है ,,,,
तभी तो आज जाना पहचाना चेहरा ,,,,,,,
सीना भेद जाता है,,,,
फिर भी खून ये उबाल नही लाता है ,,,,
उनका साहस और बढ़ जाता है ,,,,,
होसला बुलन्द हो जाता है ,,,,,
हर दिन एक न्य ही खेल नजर आता है ,,,,,!!!
,,,,,,भगत सिंह बेनीवाल,,,,,,,
आज भी महक आ रही है ,,,
उस स्याही और पन्नो में ,,,
दिल खिल उठता है,,,,
आँखों में सेलाब उठता है ,,,,
हर शब्द ,लाइन पहरा बोलता है ,,,
और तस्वीर आपकी ही ,,,,,
नजरों में नजर आती है ,,,,
इन पन्नो को छिपाने की ,,,,
लाखों कोशिशें उनकी नाकाम जाती है ,,,
आज का खून जमा हुआ नजर आता है ,,,,
तभी तो आज जाना पहचाना चेहरा ,,,,,,,
सीना भेद जाता है,,,,
फिर भी खून ये उबाल नही लाता है ,,,,
उनका साहस और बढ़ जाता है ,,,,,
होसला बुलन्द हो जाता है ,,,,,
हर दिन एक न्य ही खेल नजर आता है ,,,,,!!!
,,,,,,भगत सिंह बेनीवाल,,,,,,,
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