Saturday, 29 September 2012

हमे आदत है खून पसीने की खाने की


भुला देना चाहते है आज
उनके अमिट त्याग ,बलिदान
और सुंदर सी उन तस्वीरों को
आज वो जिनकी रगों में बसा है नमक
गोरे दरबारों का ,,,,,,
रखना चाहते है तीन ही चहरे
इस वतन में वो
गाँधी ,नेहरु इन्द्रा,,,,,,
ऐसा होने नही देंगे हम
हमने नमक वतन का खाया है
हमारी रगो में बसा है
नमक इस वतन का
जिसने भी नमक बनाया है
उसने खून और पसीना बहाया है
हमे आदत है खून पसीने की खाने की ,,,,,,!!!!
"जय हिंद जय भारत "
"इन्कलाब जिंदाबाद"

1 comment:

  1. बहुत बढ़िया विचार हैं आपके , सुंदर रचना

    ReplyDelete