जख्म जब और भी और
भी हरा हो जाता है
जब मेरे वतन के सिपाही
का जनाजा ,,,
नेता-अभिनेता के काफिले
के आगे फीका नजर आता है
बिना किसी शोर के
पतली सी गली से गुजर
जाता है मेरा दिल उसकी
छोटी सी झलक को तरस जाता है
उसको में हर कंगूरे पर हाथ
बांधे पता हूँ ,,,,,,,,,,
उसके लिए इतना कुछ हो जाता है
जो जीता है खुद के लिए
इक अमिट मुस्कान के साथ
अपने प्राण कर देता है वतन के हवाले
उसके लिए कोई अपने आशियें से बाहर
नही आता है ,,,,,,
जख्म जब और भी हरा हो जाता है
जब ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
पतली सी गली से गुजर
जाता है मेरा दिल उसकी
छोटी सी झलक को तरस जाता है
उसको में हर कंगूरे पर हाथ
बांधे पता हूँ ,,,,,,,,,,
उसके लिए इतना कुछ हो जाता है
जो जीता है खुद के लिए
इक अमिट मुस्कान के साथ
अपने प्राण कर देता है वतन के हवाले
उसके लिए कोई अपने आशियें से बाहर
नही आता है ,,,,,,
जख्म जब और भी हरा हो जाता है
जब ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।

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