Saturday, 20 October 2012

अनचाहा सपना

वो अपनी याद नही दिलाते है
वो तो इक अनचाहा
सपना था
जिसे देख लिया हमे
जैसे -तैसे
वो क्या कर क्या
कह गये
इक प्यारी सी नजर को दो -चार
कर गये
नजरों में नजरें ही ऐसी

भर गये खुद को खुद से अलग
कर गये ,,,,,,,,,,,,!!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।

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