कबतक डालते रहेंगे
अपनी खुशियाँ उनकी
मशालों में ,,,,,,,
खुद के घरों के आँगन में
अँधेरा करके ,,,,,
कबतक देंगें पहरे उनके
कंगूरों के लिए ,,,
अपने घरों की चोघट
सुनी छोड.कर
जो हमारे सामने
अपनी खुशियाँ उनकी
मशालों में ,,,,,,,
खुद के घरों के आँगन में
अँधेरा करके ,,,,,
कबतक देंगें पहरे उनके
कंगूरों के लिए ,,,
अपने घरों की चोघट
सुनी छोड.कर
जो हमारे सामने
हमारे ही वतन को
को खोखला कर रहें है
हमारी आँखों में धुल डालकर ,,,,!!!
।भगत सिंह बेनीवाल ।
को खोखला कर रहें है
हमारी आँखों में धुल डालकर ,,,,!!!
।भगत सिंह बेनीवाल ।
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