Sunday, 14 October 2012

हम क्या है क्या थे

हम क्या है क्या थे
इस बात को हमारे
माता-पिता से बेहतर
कोई नही जानता है
हम क्या होंगे ये
हम खुद जानते है

बस यही हमारे
माता -पिता नही
जानते है ,,,,,,
इक अजनबी की
खातिर अपने
माता -पिता को भूल
जाते है उसके लिए
जान देने की जरुरत ही
नही है हम उससे जान
देने का वायदा कर जाते है
उनकी वजह से हम हर
चोराहे पर झुक जाते है
उनके लिए सुंदर -२
गुलदस्ते खरीदते रहते है
माता -पिता को कभी
भूल कर भी कोई
गुलदस्ता नही दिया
आज उसी माँ -बाप को
भूल गया जिसने तुम्हारे
लिए अपना सपना
भुला दिया ,,,,
तुने आज ये सिला दिया ,,,,,,,,,,,,,,,!!!!
।भगत सिंह बेनीवाल ।

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