आपने कहा हमसे की
मंजिलें पा तो लूँ में ,,,
पर सीढियाँ नही है
हमने अपने कंधे,,,,,,
तुम्हारे हवाले कर दिए
तुमने पाली मंजिलें ,,,,,
हमारे कन्धों को आज
भी इंतजार तुम्हारा है ,,,,
छोटी सी चाहत है की
की तुं आकर देख ले ,,,,,
मंजिलें पा तो लूँ में ,,,
पर सीढियाँ नही है
हमने अपने कंधे,,,,,,
तुम्हारे हवाले कर दिए
तुमने पाली मंजिलें ,,,,,
हमारे कन्धों को आज
भी इंतजार तुम्हारा है ,,,,
छोटी सी चाहत है की
की तुं आकर देख ले ,,,,,
अपनी आँखों से
की जख्म दिल में
नही कन्धों पे भी होते है ,,,!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
की जख्म दिल में
नही कन्धों पे भी होते है ,,,!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
वो नहीं देखते यही रीत है
ReplyDeleteसुंदर अभिव्यक्ति
thanks dilbag ji
Delete