तुन आता है मेरा आँगन महक उठता है
आँखों का तप शांत हो जाता है
जो बेठी थी तेरी इक झलक के लिए
कानो का बहरा पन टूट जाता है
जुबान का गूंगापन चला जाता है,,,,,,,,,,,,,,
कसर नही रहती है मेरी तरफ से
वो ही चाहत वही आदत रहती है
क्या चल रहा है तेरे जहन में
ये मैं जान नही सकता
चहरे पर मेरी निगाहें नही है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
आँखों का तप शांत हो जाता है
जो बेठी थी तेरी इक झलक के लिए
कानो का बहरा पन टूट जाता है
जुबान का गूंगापन चला जाता है,,,,,,,,,,,,,,
कसर नही रहती है मेरी तरफ से
वो ही चाहत वही आदत रहती है
क्या चल रहा है तेरे जहन में
ये मैं जान नही सकता
चहरे पर मेरी निगाहें नही है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मैं तो दिल से देख रहा हूँ
तुम चले जाते हो बस छोटी सी
मुलाकात के बाद
मैंने कभी ना सोचा था अब तक
बस तेरी ये छोटी सी मुलाकात
मुझे मजबूर कर देती है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मैं सोचता रहता हूँ आँखे भरती रहती है
जो कभी करती भी तेरी झलक के लिए
तप किया करती थी खुद को कोसती है
सवाल तुमसे नही मुझसे करती है ,,,,,,,,,,,,,,,
क्यों किया मुझे तुमने मुझे मजबूर
की बैठ जा इन राहों में कोई है
मेरा अपना जो आएगा तू देखना
उस पल को ऐसा पल तुझे कभी
नजर नही आएगा ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मेरे कान भी पूछ रहे है मुझसे
की तुमने क्यों रोका हमे की
मत कुछ सुनना उसके आने से
पहले वो सुनाएगा आप कभी
ऐसा नही सुन पाओगे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मेरा मुख पूछ रहा है मुझसे की
क्यों रोका तुमने मुझे की कुछ भी मत
बोलना तुम उसके आने से पहले उसके
लिए जो भी बोलगा कभी भूल
नही पायेगा,,,,,,,,,,,,,,,
मुझे ये पता नही था मेरे दोस्त की ये
सब इक छोटी सी मुलाकात में ही ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ,,,!!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
तुम चले जाते हो बस छोटी सी
मुलाकात के बाद
मैंने कभी ना सोचा था अब तक
बस तेरी ये छोटी सी मुलाकात
मुझे मजबूर कर देती है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मैं सोचता रहता हूँ आँखे भरती रहती है
जो कभी करती भी तेरी झलक के लिए
तप किया करती थी खुद को कोसती है
सवाल तुमसे नही मुझसे करती है ,,,,,,,,,,,,,,,
क्यों किया मुझे तुमने मुझे मजबूर
की बैठ जा इन राहों में कोई है
मेरा अपना जो आएगा तू देखना
उस पल को ऐसा पल तुझे कभी
नजर नही आएगा ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मेरे कान भी पूछ रहे है मुझसे
की तुमने क्यों रोका हमे की
मत कुछ सुनना उसके आने से
पहले वो सुनाएगा आप कभी
ऐसा नही सुन पाओगे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मेरा मुख पूछ रहा है मुझसे की
क्यों रोका तुमने मुझे की कुछ भी मत
बोलना तुम उसके आने से पहले उसके
लिए जो भी बोलगा कभी भूल
नही पायेगा,,,,,,,,,,,,,,,
मुझे ये पता नही था मेरे दोस्त की ये
सब इक छोटी सी मुलाकात में ही ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
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