गर्म पानी से घाव नही जला करता है
चाँद की उतावली में सूरज छिपा नही करता है
ससुराल में दामाद नही पनपा करता है
ये हम नही इतिहास कहता है ,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
चाँद की उतावली में सूरज छिपा नही करता है
ससुराल में दामाद नही पनपा करता है
ये हम नही इतिहास कहता है ,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।
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