Sunday, 14 October 2012

कागज

इकठठा करलोगे
दो-चार कागज
यहाँ पे ,,,,,,,
किसी को
गुमराह करके
उनका तो कुछ नही
होगा ,,,,
पन्नो में नाम
नही मिलेगा
आने वाली

पीढ़ी को ,,
रास्ता बदलेंगी
दुनिया इन कंगूरों
दो देखकर
पक्षीयों के घोसले
नजर आयेंगे
देख लेगा
अगर मिले समय
तो यहाँ आकर
पक्षी चाह्चाते
नजर आयेंगे ,,,
इकठठा करलोगे
दो-चार कागज
यहाँ पे ,,,,,,,
किसी को
गुमराह करके,,,,,,,,,,,,,,,!!!
।।भगत सिंह बेनीवाल ।।

No comments:

Post a Comment