Sunday, 21 October 2012

सरहद

सरहद के उस पार से...........
हर दिन नई आवाजें आती है ................
मेरे दरवाजे पे तो दस्तक दे जाती है ..................
रोम -रोम में समा जाती है ....................................
क्या उनके दरवाजे के आगे से ....................................
निकल जाती है ..............................................................!!!!!

।।भगत सिंह बेनीवाल ।।

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