Saturday, 6 October 2012

कंधे

आपने कहा हमसे की
मंजिलें पा तो लूँ में ,,,
पर सीढियाँ नही है
हमने अपने कंधे,,,,,,
तुम्हारे हवाले कर दिए
तुमने पाली मंजिलें ,,,,,
हमारे कन्धों को आज
भी इंतजार तुम्हारा है ,,,,
छोटी सी चाहत है की
की तुं आकर देख ले ,,,,,

अपनी आँखों से
की जख्म दिल में
नही कन्धों पे भी होते है ,,,!!!

।।भगत सिंह बेनीवाल ।।

2 comments:

  1. वो नहीं देखते यही रीत है
    सुंदर अभिव्यक्ति

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