Thursday, 10 January 2013

जियो तुम जी भर के
मत बढो तुम दम भर के
कम जी लो तुम
मत जियो तुम
अपनो के सर कलम करा के
अरे अब बाहर तो निकलो तुम
तुम्हारे सोने के मकानो से
निंदा का डर तो जिंदा दिलों को होता है
निंदा एक बार होती है
जो मर जाता है जीते जी
उसका कोई इमान नही होता है
हजार बार निंदा खुद की तोहिन होती है
हर दिन भारत माँ की आंखें नम होती है
एक मां ,बहिन,सुहागन भाई,बाप
लाकर दो उनको अपने लाल का सर
तुमको है किसका डर
वो अपना फर्ज निभा गये
क्या तुम भी अपना निभाओगें
क्या ईंट का जबाब पत्थर से दे पाओगे
वतन की आबरु के वास्ते जाता है
जवान सरहद में
वो आपके पुरस्कार की खातिर नही …… जय हिन्द ……

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