पहले जननी के अरमान तोड़ते है
बाद में जन्मभूमि के …
हमसे मोह ही नही है तुमको
सोचने का अधिकार किसने
दिया है हमारे बारे में तुमको
कोई नाता मानवता से तुम्हारा होता
रुख काली गुफाओं का ना होता
मन ना भरा वहां भी तुम्हारा
गुमराह इस जनता को करने
का खेल रचाया तुमने
आहिस्ता -आहिस्ता खेल को बढाया
जम गया खेल तुम्हारा
हाथ जोड़कर पैसा कमाया
पैसे के बल पे हर अखबार ,टीवी में
आपका नाम आया
नाम की तो उनको जरुरत होती है
जो बेनाम होते है
जब हुया जिक्र कम तुम्हारे नाम का
बिन बुलाया मेहमान
साबित किया तुमने खुद को
जिनको पता ना हो इंसानियत के रिस्ते
वो किसी के बाप नही होते
हाथ जोड़ कर ताली बजाने से
किसी के कम पाप नही होते
जिनको है अपने काम से वास्ता
वो ऐसी झूठी दुकानों के आस-पास नजर नही आते …… जय हिन्द
..………… भगत
बाद में जन्मभूमि के …
हमसे मोह ही नही है तुमको
सोचने का अधिकार किसने
दिया है हमारे बारे में तुमको
कोई नाता मानवता से तुम्हारा होता
रुख काली गुफाओं का ना होता
मन ना भरा वहां भी तुम्हारा
गुमराह इस जनता को करने
का खेल रचाया तुमने
आहिस्ता -आहिस्ता खेल को बढाया
जम गया खेल तुम्हारा
हाथ जोड़कर पैसा कमाया
पैसे के बल पे हर अखबार ,टीवी में
आपका नाम आया
नाम की तो उनको जरुरत होती है
जो बेनाम होते है
जब हुया जिक्र कम तुम्हारे नाम का
बिन बुलाया मेहमान
साबित किया तुमने खुद को
जिनको पता ना हो इंसानियत के रिस्ते
वो किसी के बाप नही होते
हाथ जोड़ कर ताली बजाने से
किसी के कम पाप नही होते
जिनको है अपने काम से वास्ता
वो ऐसी झूठी दुकानों के आस-पास नजर नही आते …… जय हिन्द
..………… भगत
No comments:
Post a Comment