इन उच्चे कंगुरों से
इंसाफ की आवाज़ कब आयेगी
हालातों से जुझ रहा है
ये सुनहरा वतन मेरा
ऐसे बांसों की ताकत ओर पानी की बोछारें
हमने अपने बदन को
आग पर पकाया है
ये शरीर सब सह लेगा
इंसाफ ओर बहिन के लिये
ये आवाज़ अब ना आयी
तो कभी नही ……जय हिन्द
भगत ……
इंसाफ की आवाज़ कब आयेगी
हालातों से जुझ रहा है
ये सुनहरा वतन मेरा
ऐसे बांसों की ताकत ओर पानी की बोछारें
हमने अपने बदन को
आग पर पकाया है
ये शरीर सब सह लेगा
इंसाफ ओर बहिन के लिये
ये आवाज़ अब ना आयी
तो कभी नही ……जय हिन्द
भगत ……
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