उस सीसे का भी दर्द जानो तुम …
हमारी झुठी मुस्कान सहता है …
हर कोई उस पर डालकर दबाव
अपनी झुठी मुस्कान की वाहा-वाही चाहता है
दाद देता हुं में सिसे के जिगरे को
ये सब सहकर भी अपने आंसू छिपाता है
………भगत ………
हमारी झुठी मुस्कान सहता है …
हर कोई उस पर डालकर दबाव
अपनी झुठी मुस्कान की वाहा-वाही चाहता है
दाद देता हुं में सिसे के जिगरे को
ये सब सहकर भी अपने आंसू छिपाता है
………भगत ………
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