अभी इतनी ही लिखुंगा ओर कल
किस -किस
चहरे को पहचानेंगी
मेरी नजरें
किस को भाई
किस को चाचा
किस को ताऊ
किस को दादा माँनेगी
मेरी नजरें
मुझे तो हर शक्ल में
शैतान नजर आता है
ये जहां मुझे जिन्दा श्मशान
नजर आता है …
हर दिन -रात मेरी खातिर
जख्मो का सैलाब लाता है
उस थाली में जहर
उस गिलास में तेजाब लाता है
क्या रिस्ता है मेरा तुम से
सदियों से अनजान हुं
पूरे अर्थ हो पता ये
मुमकिन नही …
मै भी तो एक हिस्सा हुं
इंसानियत का …
मेरा भी एक किस्सा है
भगत …॥
किस -किस
चहरे को पहचानेंगी
मेरी नजरें
किस को भाई
किस को चाचा
किस को ताऊ
किस को दादा माँनेगी
मेरी नजरें
मुझे तो हर शक्ल में
शैतान नजर आता है
ये जहां मुझे जिन्दा श्मशान
नजर आता है …
हर दिन -रात मेरी खातिर
जख्मो का सैलाब लाता है
उस थाली में जहर
उस गिलास में तेजाब लाता है
क्या रिस्ता है मेरा तुम से
सदियों से अनजान हुं
पूरे अर्थ हो पता ये
मुमकिन नही …
मै भी तो एक हिस्सा हुं
इंसानियत का …
मेरा भी एक किस्सा है
भगत …॥
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