आत्म चेतना जब तक नही होगी …… बड़े से बड़ा कानुन
पांव नही जमा पायेगा … आत्म चेतना भी एक कानुन है …… आज देश के जो हालात है
उनको सुधारने के लिये ओर जड़ो से उखाड़ने के लिये …खुद के सवालों का खुद को
ही जबाब देना होगा की हम कहां तक सही है यथार्थ का हमारे साथ कितना गहरा
रिस्ता है आज जो सवाल हमें खुद से करने चाहिये वो हम खुद से ना करके
दुसरों से कर रहे है …… कानुन कभी भी भय का काम नही करता है अगर कानुन का
ही भय होता तो … आज ये हत्यायें हो रही है……चोरी …डकैती … भ्रष्टाचार फैल
रहा है … इत्यादि … क्या इनके लिये कानुन नही बने हुये है … आत्म भय का
होना बहुत जरुरी है …… ऐसा मैं मानता हुं
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