Thursday, 10 January 2013

हमें तो है आदत है
ठहाके लगाकर मुस्कुराने की ……
हमारी मुस्कुराहट आपके
दिलों - दिमाग में घर कर गयी ……
तो इसमें कसुर हमारा क्या है
हम तो आदतन मजबूर है ……
हम जहां भी जाते है
अपनी आदत साथ ले के जाते है ……
हमें पता नही था आपका की
आप भी आने वाले हो ………
सालों से सूखे रेगिस्तान के पेड़ भी
हमारी मुस्कान पा कर हरे हो जाते है ……
ये सोचकर की इस भीषण गर्मी में
हम अपनी मुस्कान ना खो दें ………
आपका यूं अचानक खो जाना
तो स्वभाविक है ………
आपका ये चेहरा देख कर
हम फिर मुस्कुराना चाहते है ……… भगत …………

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