किस ओर कौनसे चौराहे
पर बसायेंगे आशियाना
हम ओर तुम
हर चौराहे पर शैतानों
का पहरा है
इन शैतानों का इंसानियत
से नही जुल्मों से गहरा नाता है
किस-किस को सुनायेंगे
किस्सा अपनी शराफ़त का
वो बीत गया है
जो लम्हा था हिफ़ाज़त का
भगत ……
पर बसायेंगे आशियाना
हम ओर तुम
हर चौराहे पर शैतानों
का पहरा है
इन शैतानों का इंसानियत
से नही जुल्मों से गहरा नाता है
किस-किस को सुनायेंगे
किस्सा अपनी शराफ़त का
वो बीत गया है
जो लम्हा था हिफ़ाज़त का
भगत ……
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