अरे झुगी-झोपड़ी वालो
तुम जाग जाओ
मै भी जानता हुं
तुम भी जानतें हो
हकीक़त क्या है्……
मत लगाओ ये आस
उन उंची तस्वीरों से
वो जाग जायेंगी ……
छटक कर दिवारों से
यथार्थ पर आ जायेंगी ……
वो सोये रहेंगे तो भी
उनकी कश्तीयां
सात समंदर पार जायेंगी ……
उनको जरुरत भी नही है
हमारे लिये जागने की………
हमें जरुरत है खुद के लिये
जागने की खुद के लिये भागने की……
हम ना जागे हम ना भागे तो
हमारी कश्तीयां
समंदर के किनारे भी ना झांक ……
लहरों से लड़ना तो बहुत दुर की बात है ………………जय हिन्द
भगत सिंह बेनीवाल
तुम जाग जाओ
मै भी जानता हुं
तुम भी जानतें हो
हकीक़त क्या है्……
मत लगाओ ये आस
उन उंची तस्वीरों से
वो जाग जायेंगी ……
छटक कर दिवारों से
यथार्थ पर आ जायेंगी ……
वो सोये रहेंगे तो भी
उनकी कश्तीयां
सात समंदर पार जायेंगी ……
उनको जरुरत भी नही है
हमारे लिये जागने की………
हमें जरुरत है खुद के लिये
जागने की खुद के लिये भागने की……
हम ना जागे हम ना भागे तो
हमारी कश्तीयां
समंदर के किनारे भी ना झांक ……
लहरों से लड़ना तो बहुत दुर की बात है ………………जय हिन्द
भगत सिंह बेनीवाल
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