सफेद चद्दरों में लिपटे
गद्दार देखता हुं
दो-चार नही
इनसे तो खुद ही
निपट लुं
कई हजार देखता हुं
जो कहते है मुझे की
आप आगे बढो …
देश के लिये
लड़ो इंसाफ ले लिये …
उनको ही उन दरबारों के आगे
गुलदस्तों के साथ देखता हुं
ये देखकर हाल
घर की चोखट की ओर लौटता हुं
यहां वापिस शायद ही आ पाऊँ ……………जय हिन्द
भगत ……
गद्दार देखता हुं
दो-चार नही
इनसे तो खुद ही
निपट लुं
कई हजार देखता हुं
जो कहते है मुझे की
आप आगे बढो …
देश के लिये
लड़ो इंसाफ ले लिये …
उनको ही उन दरबारों के आगे
गुलदस्तों के साथ देखता हुं
ये देखकर हाल
घर की चोखट की ओर लौटता हुं
यहां वापिस शायद ही आ पाऊँ ……………जय हिन्द
भगत ……
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