अगर हो हौसला बुलंद
वतन पर मर मिटने का
ना सर्दी आड़े आती है
ना गर्मी आड़े आती है
ॠतुयें है ये आती जाती रहती है
वतन के हालात सुधारने में
कभी आड़े नही आती है
अगर मादा रखते हो
अनुकूल परिस्थितियाँ बनाने का
मुर्दा लाशों में भी एक बार तो
वतन के नाम पे सांसें आ जाती है
जाते जाते ये मुर्दा लाश भी
बेजुबानों को फटकार सुना जाती है
अगर बढे आगे हम ध्वज वतन का
लेकर ये समंदर की उठती लहरें
तुफान, आंधीयां भी ध्वज देखर हमारे हाथों
हमें रास्ता देती हुई नजर आती है ………… जय हिन्द
………………भगत …………॥
वतन पर मर मिटने का
ना सर्दी आड़े आती है
ना गर्मी आड़े आती है
ॠतुयें है ये आती जाती रहती है
वतन के हालात सुधारने में
कभी आड़े नही आती है
अगर मादा रखते हो
अनुकूल परिस्थितियाँ बनाने का
मुर्दा लाशों में भी एक बार तो
वतन के नाम पे सांसें आ जाती है
जाते जाते ये मुर्दा लाश भी
बेजुबानों को फटकार सुना जाती है
अगर बढे आगे हम ध्वज वतन का
लेकर ये समंदर की उठती लहरें
तुफान, आंधीयां भी ध्वज देखर हमारे हाथों
हमें रास्ता देती हुई नजर आती है ………… जय हिन्द
………………भगत …………॥
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