Thursday, 10 January 2013

उस घर की किल्लकारी कल से मेरे कानों में
गुंज रही है
वो चोखट भी कब से राह देख रही थी उसका
मां हर दिन हाल पूछ रही थी उसका
एक बहिन उसके ना आने का सवाल पूछ रही थी
एक सुहागन की मुस्कान सूख रही थी
बाप-भाई की निगाहें दिवार पर
उस तस्वीर को निहार रही थी
आंगन की तुलसी भी महक खो रही थी
वो घर के जानवर उसके आने की आस लगाये बैठे थे …………… भगत

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