उस घर की किल्लकारी कल से मेरे कानों में
गुंज रही है
वो चोखट भी कब से राह देख रही थी उसका
मां हर दिन हाल पूछ रही थी उसका
एक बहिन उसके ना आने का सवाल पूछ रही थी
एक सुहागन की मुस्कान सूख रही थी
बाप-भाई की निगाहें दिवार पर
उस तस्वीर को निहार रही थी
आंगन की तुलसी भी महक खो रही थी
वो घर के जानवर उसके आने की आस लगाये बैठे थे …………… भगत
गुंज रही है
वो चोखट भी कब से राह देख रही थी उसका
मां हर दिन हाल पूछ रही थी उसका
एक बहिन उसके ना आने का सवाल पूछ रही थी
एक सुहागन की मुस्कान सूख रही थी
बाप-भाई की निगाहें दिवार पर
उस तस्वीर को निहार रही थी
आंगन की तुलसी भी महक खो रही थी
वो घर के जानवर उसके आने की आस लगाये बैठे थे …………… भगत
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